Monthly Archives: October 2010

तुम बुरे हो

सब रूठे हैं यहाँ मुझसे, किसी के पास दो पल नहीं| मैं आगे बढ़ा और हाथ बढ़ा कर पुछा “कैसे हो दोस्त?”, उसने कहा “तुम बुरे हो” | यह देख हमने भी अपने दरवाज़े बंद किये |और खुद में सिमट कर रह गए | एक दिन कोई दरवाज़े पर खड़ा दिखा |उसने हाथ बढ़ाया और मुझसे पुछा “कैसे हो दोस्त” | […]